कहाँ से आया
झाबुआ वंश की हमारी GI-टैग मुर्गियों से, देवघर में खुली पली हुईं। सप्लाई कम है — वजह नस्ल ख़ुद है, कोई बहाना नहीं।
फार्म के अंडे
दुर्लभ, और दाम के लायक़
कड़कनाथ मुर्गी साल भर में मुश्किल से 80 अंडे देती है, जबकि बाज़ारू लेयर 300 देती है। दाम की पूरी कहानी यही है - इसे जल्दी करवाने का कोई रास्ता नहीं।
कहाँ से आया
झाबुआ वंश की हमारी GI-टैग मुर्गियों से, देवघर में खुली पली हुईं। सप्लाई कम है — वजह नस्ल ख़ुद है, कोई बहाना नहीं।
क्या खाता है
वही चराई-पहले वाली ख़ुराक जो परिंदों की है: कीड़े, साग और दरदरा मक्का।
कैसे पाला जाता है
झाबुआ वंश की हमारी GI-टैग मुर्गियों से, देवघर में खुली पली हुईं। सप्लाई नस्ल की वजह से कम है, हमारी वजह से नहीं।
क्यों लेना चाहिए
आदिवासी इलाक़ों में सदियों से नई माँओं और बीमारी से उठ रहे लोगों को दिया जाता रहा है — अमीनो एसिड ज़्यादा, कोलेस्ट्रॉल कम।
पोषण
लगभग 75 kcal प्रति अंडा।
7.1 ग्राम प्रति अंडा
प्रोटीन
18 क़िस्म
अमीनो एसिड
आम अंडों से कम
कोलेस्ट्रॉल
~80 अंडे प्रति मुर्गी सालाना
पैदावार
एक नज़र में