कहाँ से आया
1870 के दशक में पेकिंग से पश्चिम पहुँची, और आज दुनिया भर में रोस्ट का पैमाना यही है। हमारे यहाँ दिन भर खुले पानी वाले तालाब पर पलती है।
बत्तख़
रोस्ट वाली बत्तख़
अगर आपको कुरकुरी खाल चाहिए और ट्रे में बची हुई साफ़ पिघली चर्बी, तो यही परिंदा है। दुनिया भर में रोस्ट का पैमाना ये यूँ ही नहीं बना।
कहाँ से आया
1870 के दशक में पेकिंग से पश्चिम पहुँची, और आज दुनिया भर में रोस्ट का पैमाना यही है। हमारे यहाँ दिन भर खुले पानी वाले तालाब पर पलती है।
क्या खाता है
रोज़ की तालाब चराई के साथ, आख़िरी कुछ हफ़्ते मक्के पर फ़िनिशिंग।
कैसे पाला जाता है
दिन भर खुले पानी तक पहुँच के साथ पली - खाल में जो निखार आता है वो इसी से।
क्यों लेना चाहिए
हमारी सब बत्तख़ों में सबसे मोटी चर्बी की परत, जो पिघलकर साफ़ कुकिंग फैट देती है। जिस्म बड़ा, हिस्से भी बड़े।
पोषण
लगभग 200 kcal प्रति 100 ग्राम - हमारे यहाँ का सबसे गाढ़ा परिंदा।
18 ग्राम / 100 ग्राम
प्रोटीन
11 ग्राम / 100 ग्राम
फैट
2.5-3.2 किलो
साफ़ वज़न
ज़्यादा
सेलेनियम
एक नज़र में
सामान
बनाने का तरीक़ा