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मौसमी फल

जामुन

बरसात की दवा

साल के दो महीने, रंगी हुई उँगलियाँ, बैंगनी ज़बानें - और बीज का वो चूर्ण जिसे आयुर्वेद सदियों से शुगर के लिए बताता आया है।

कहाँ से आया

फार्म के तालाब के किनारे अपने आप खड़े जामुन के पेड़, जुलाई-अगस्त की बारिश में वैसे ही फलते हैं जैसे दशकों से फलते आए हैं।

क्या खाता है

तालाब किनारे अपने आप खड़े पेड़। पूरी तरह बारिश के भरोसे, पूरी तरह बिना स्प्रे।

कैसे पाला जाता है

कपड़े पर झाड़कर उतारे जाते हैं और उसी सुबह हाथ से छाँटे जाते हैं - जामुन तो ज़रा सी बात पर दब जाता है।

क्यों लेना चाहिए

बीज में मौजूद जैम्बोलीन और जैम्बोसीन स्टार्च को शुगर में बदलने की रफ़्तार धीमी करते हैं — इसीलिए आयुर्वेद सदियों से इसे शुगर में इस्तेमाल करता आया है।

पोषण

लगभग 62 kcal प्रति 100 ग्राम।

18 मिग्रा / 100 ग्राम

विटामिन सी

62 kcal / 100 ग्राम

कैलोरी

बहुत कम

ग्लाइसेमिक इंडेक्स

जुलाई-अगस्त

सीज़न

एक नज़र में

  • ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम
  • शुगर संभालने के लिए परंपरागत तौर पर इस्तेमाल
  • एंथोसायनिन और विटामिन सी भरपूर
  • सीज़न: सिर्फ़ जुलाई से अगस्त

रेसिपी

जामुन का शरबत

20 मिनट 1 लीटर बनता है

सामान

  • 500 ग्राम जामुन
  • 4 बड़े चम्मच चीनी या स्वाद के हिसाब से
  • 1 छोटा चम्मच काला नमक
  • आधा छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर
  • बर्फ़ और ठंडा पानी

बनाने का तरीक़ा

  1. 1 जामुन को नमक से मलिए, धोइए, और हाथ से गूदा बीज से अलग कर लीजिए।
  2. 2 बीज फेंकिए मत - सुखाकर पीस लीजिए और चूर्ण डिब्बे में रख लीजिए।
  3. 3 गूदे को चीनी और थोड़े पानी के साथ पीसकर छान लीजिए।
  4. 4 काला नमक और जीरा मिलाइए, ठंडा पानी और बर्फ़ डालिए।
  5. 5 शुगर के लिए आयुर्वेद असल में बीज का चूर्ण बताता है; शरबत तो बस वो वजह है जिससे आपने फल ख़रीदा।

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